किसी भी समाज या राष्ट्र की प्रगति वहां की महिलाओं की स्थिति पर निर्भर करती है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि 'जिस प्रकार एक पक्षी केवल एक पंख से नहीं उड़ सकता, उसी प्रकार कोई भी राष्ट्र उन्नति नहीं कर सकता यदि वहां की महिलाएं पिछड़ी हों'। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक, महिलाओं ने समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, राजनीति, विज्ञान और खेल के मैदान में अपनी योग्यता साबित कर रही हैं। एक माँ के रूप में वह अगली पीढ़ी का निर्माण करती है और उसे संस्कार देती है। घर के प्रबंधन से लेकर देश चलाने तक, महिलाओं की प्रबंधन क्षमता अद्वितीय है। हालांकि, आज भी समाज के कुछ हिस्सों में महिलाओं को भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ता है। महिला सशक्तिकरण का अर्थ है उन्हें अपने निर्णय लेने की आजादी देना और समान अवसर प्रदान करना। कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़ से मिटाना आवश्यक है। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र होंगी, तो पूरा परिवार और देश समृद्ध होगा। सरकार ने महिलाओं के कल्याण के लिए कई योजनाएं जैसे 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और उज्ज्वला योजना शुरू की हैं। हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी और महिलाओं को बराबरी का दर्जा देना होगा। एक न्यायपूर्ण और खुशहाल समाज की कल्पना महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना अधूरी है।